Opinion by Gaurav Paswan | Opined

Gaurav Paswan
Gaurav Paswan Jun 27, 2020

#Shloka
कश्चित् कस्यचिन्मित्रं, न कश्चित् कस्यचित्
रिपु:।
अर्थतस्तु निबध्यन्ते, मित्राणि रिपवस्तथा॥
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Hindi Translation
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न कोई किसी का मित्र है और न ही शत्रु, कार्यवश ही लोग मित्र और शत्रु बनते हैं॥