Opinion by शशांक | Opined

शशांक
शशांक Jun 1, 2020

रत्नाकरधौतपदां हिमालयकिरीटिनीम्।
ब्रह्मराजर्षिरत्नाढ्याम वन्देभारतमातम्॥

भावार्थ-जिनके पैर समुद्र द्वारा धोए जाते हैं और जो हिमालय से सुशोभित हैं, वह, जो कई ब्रह्मऋषियों और राजऋषियों से भरा है।ऐसी मेरी भारत माता को अभिवन्दन।
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